Friday, September 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Contact Us
Jagat Anandeshwar Times
Advertisement
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली NCR
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • झारखंड
    • गुजरात
    • छतीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू & कश्मीर
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • लाइफस्टाइल
    • धर्म
    • हेल्थ
    • फूड
    • फैशन
    • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • खेल
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो
  • अन्य
No Result
View All Result
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली NCR
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • झारखंड
    • गुजरात
    • छतीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू & कश्मीर
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • लाइफस्टाइल
    • धर्म
    • हेल्थ
    • फूड
    • फैशन
    • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • खेल
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो
  • अन्य
No Result
View All Result
Jagat Anandeshwar Times
No Result
View All Result
Home राजनीति

TMC से ममता और LJP से चिराग को कैसे मिला नाम-निशान? जानें शिंदे केस का पूरा नियम

News Desk by News Desk
September 18, 2026
in राजनीति
0
TMC से ममता और LJP से चिराग को कैसे मिला नाम-निशान? जानें शिंदे केस का पूरा नियम
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

नई दिल्ली

ममता बनर्जी ने मई में पश्चिम बंगाल गंवाया और सितंबर में तृणमूल कांग्रेस नाम और दो फूल जोड़ा चुनाव चिह्न भी छोड़ना पड़ा। हालांकि, इनका इस्तेमाल अरूप रॉय गुट भी नहीं कर सकेगा। अंतरिम आदेश के जरिए मुख्य नाम और चिह्न को फ्रीज कर दिया गया है। आगे जाकर स्थिति बदल भी सकती है। सवाल है कि जब साल 2022 में शिवसेना टूटने के मामले में महाराष्ट्र के मौजूदा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले गुट को चुनाव आयोग ने नाम और निशान कैसे दे दिया था।

पहले समझते हैं कि अगर एक ही पार्टी में दो गुट बन जाते हैं और दोनों ही मुख्य दल होने का दावा करते हैं, तो चुनाव आयोग फैसला किस तरह से लेता है। चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968, यह वही आदेश है जिसका इस्तेमाल करके चुनाव आयोग एक पूरी प्रक्रिया से गुजरता और पता लगाता है कि किसे पार्टी का चुनाव चिह्न, झंडा और नाम मिलेगा। इसमें भी धारा 15 बेहद अहम है।
कानून समझ लेते हैं

इस कानून की धारा 15 के अनुसार, 'जब आयोग को अपने पास मौजूद जानकारी से यह पता चलता है कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के विरोधी गुट या समूह हैं और हर कोई खुद को ही वह असली दल बताता है। ऐसे में आयोग मामले से जुड़े सभी उपलब्ध तथ्यों और हालात पर विचार करने और उन गुटों या समूहों के नेताओं और अन्य लोगों की बात सुनने के बाद यह तय कर सकता है कि उन विरोधी गुटों या समूहों में से कोई एक ही वह मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है या उनमें से कोई भी नहीं है। आयोग का यह फैसला उन सभी विरोधी गुटों या समूहों पर लागू होगा।'

आसान भाषा में एक जानकार बताते हैं कि चुनाव आयोग इस बात पर फोकस करेगा कि दोनों गुटों में संगठन स्तर पर कितने सदस्य हैं। साथ ही विधायकों और सांसदों की गिनती भी अहम भूमिका निभाएगी। दोनों पक्ष इसकी जानकारी एक हलफनामे के जरिए देंगे। पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी बताते हैं कि आयोग 'रूल ऑफ मेजॉरिटी' के आधार पर फैसला करता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जांच करेगा कि किस गुट के पास सांसद, विधायक और संगठन पर ज्यादा समर्थन है।

पार्टी किसके साथ, यह पता करने का भी एक तरीका है

पूर्व चुनाव आयुक्त बताते हैं कि संगठन में ज्यादा समर्थन किसके साथ है, यह पता करने के लिए सभी पार्टी पदाधिकारी और उन लोगों को गिना जाता है, जो पार्टी के अध्यक्ष चुनने का अधिकार रखते हैं। पार्टी को इस संबंध में अपना हलफनामा दाखिल करना होता है। इसके बाद आयोग हस्ताक्षरों को मिलाता है। पूरी प्रक्रिया के बाद तय किया जाता है कि किस पार्टी को चिह्न मिलेगा।

एकनाथ शिंदे को क्यों मिल गया चुनाव चिह्न

हालांकि, शिवसेना में टूट मामले में भी चुनाव आयोग ने पहली ही बार में शिंदे गुट को मुख्य दल नहीं माना था। पहले शिवसेना नाम और तीर कमान चिह्न को फ्रीज कर दिया गया और दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न चुनने के लिए कहा गया था। 2023 में इसका अधिकार शिंदे समूह को मिला।

आयोग ने कहा था कि उनका बहुमत के परीक्षण पर आधारित है, क्योंकि शिंदे गुट का समर्थन कर रहे विधायकों को 2019 विधानसभा चुनाव में करीब 76 फीसदी वोट मिले। जबकि, उद्धव ठाकरे गुट के मामले में यह आंकड़ा 23.5 प्रतिशत पर था। उस चुनाव में अविभाजित शिवसेना के कुल 55 उम्मीदवार जीते थे। 78 पेज लंबे आदेश में आयोग ने कहा था, 'शिव सेना पार्टी का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न तीर कमान याचिकाकर्ता गुट के पास ही रहेगा।' याचिकाकर्ता शिंदे गुट था। चुनाव आयोग के सामने शिंदे गुट ने साबित किया था कि उसके पास 40 विधायकों और 18 में से 13 सांसदों का समर्थन है। साथ ही गुटों ने संगठन स्तर पर भी हस्ताक्षरों से जुड़ा एक हलफनामा आयोग में दाखिल किया था।

TMC के मामले में क्या बोला चुनाव आयोग

खास बात है कि टीएमसी के मामले में अभी अंतरिम आदेश ही जारी हुआ है। संभावनाएं हैं कि आगे चलकर किसी गुट को मुख्य नाम और चिह्न मिल भी सकता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। अंतरिम आदेश में कहा गया है, 'रिकॉर्ड पर मौजूद सभी जानकारियों पर ठीक से विचार करने के बाद… आयोग का मानना ​​है कि तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी गुट हैं, जिनमें से एक का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे की कमान अरूप रॉय संभाल रहे हैं।'

अंतरिम आदेश के अनुसार, 'अब हर गुट खुद के असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा कर रहा है, इसलिए चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राम 15 के तहत आयोग को इस मामले पर ठोस फैसला लेना होगा।' आयोग ने साफ कर दिया है कि मौजूदा उपचुनाव की स्थिति को देखते हुए ऐसा किया गया है और मौजूदा अंतरिम आदेश मामला खत्म होने तक जारी रहेगा।

खास बात है कि 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं। दोनों ही गुटों ने सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है।

चिराग पासवान मामले में किसी को नहीं मिले

यह टूट साल 2021 की है। तब रामविलास पासवान के निधन के कुछ समय बाद झोपड़ी के चिह्न वाले लोक जनशक्ति पार्टी में खटपट की खबरें तेज हो गईं थीं। दरअसल, यहां पसवान के बेटे और मौजूदा सांसद चिराग और भाई पशुपति कुमार पारस में दल को लेकर विवाद था। दोनों ही असली दल की अगुवाई का दावा कर रहे थे।

2 अक्टूबर 2021 को चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसके बाद नाम और चिह्न को फ्रीज कर दिया गया था और किसी को भी इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी। दो दिन बाद यानी 5 अक्टूबर को नए नाम और चिह्न आवंटित किए गए। खास बात है कि इसके 28 दिन बाद ही 30 अक्टूबर 2021 में बिहार में दो सीटों पर उपचुनाव होने थे। ठीक वैसा ही जैसा बंगाल में दो सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

चुनाव आयोग ने चिराग और पशुपति गुट को अपने नाम में लोक जनशक्ति पार्टी नाम का जुड़ाव रखने की अनुमति दे दी थी और नए चिह्न बांटे थे। चिराग के खाते में हेलीकॉप्टर आया और नाम लोक जनशक्ति दल (राम विलास) और चाचा पारस को सिलाई मशीन चिह्न के साथ नाम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति दल मिला था। फिलहाल, दोनों ही गुट अपने नए नाम और पहचान को बरकरार रखे हुए हैं। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में चिराग ने हेलीकॉप्टर चिह्न और नए नाम के साथ हाजीपुर सीट से जीत हासिल की थी और NDA में शामिल होकर मंत्री बने।

Previous Post

सेवा संकल्प अभियान : पीएम श्री नवोदय विद्यालय कुसमी में सफलतापूर्वक स्वास्थ्य शिविर आयोजित

Next Post

उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी डिजिटल मैपिंग, बिना नेटवर्क भी रास्ता बताएगा ऐप

News Desk

News Desk

Next Post
उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी डिजिटल मैपिंग, बिना नेटवर्क भी रास्ता बताएगा ऐप

उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी डिजिटल मैपिंग, बिना नेटवर्क भी रास्ता बताएगा ऐप

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Trending
  • Comments
  • Latest
टी-20 टीम में बड़ा बदलाव: सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर बने नए कप्तान

टी-20 टीम में बड़ा बदलाव: सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर बने नए कप्तान

June 5, 2026
Vedanta Demerger: वेदांता से निकलीं 4 नई कंपनियां, अनिल अग्रवाल का बड़ा दावा- हर बिजनेस बनेगा $100 अरब का दिग्गज

Vedanta Demerger: वेदांता से निकलीं 4 नई कंपनियां, अनिल अग्रवाल का बड़ा दावा- हर बिजनेस बनेगा $100 अरब का दिग्गज

June 15, 2026
यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

November 25, 2025
मुंबई पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: मुहर्रम जुलूस में जहरीले कैप्सूल बांटता आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: मुहर्रम जुलूस में जहरीले कैप्सूल बांटता आरोपी गिरफ्तार

June 28, 2026
राम मंदिर में ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा जय श्रीराम, श्रद्धालुओं को देवलोक की अनुभूति

राम मंदिर में ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा जय श्रीराम, श्रद्धालुओं को देवलोक की अनुभूति

0
यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

0
मुझसे नहीं होगा ये काम, नोएडा में SIR की ड्यूटी से परेशान महिला टीचर ने BLO पद से दिया इस्तीफा

मुझसे नहीं होगा ये काम, नोएडा में SIR की ड्यूटी से परेशान महिला टीचर ने BLO पद से दिया इस्तीफा

0
मैं पूरे देश में बीजेपी की नींव हिला दूंगी, ममता बनर्जी की बीजेपी को बड़ी चेतावनी, SIR पर भड़कीं

मैं पूरे देश में बीजेपी की नींव हिला दूंगी, ममता बनर्जी की बीजेपी को बड़ी चेतावनी, SIR पर भड़कीं

0
अंकिता भंडारी को न्याय की मांग, गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर दी श्रद्धांजलि

अंकिता भंडारी को न्याय की मांग, गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर दी श्रद्धांजलि

September 18, 2026
नेपाल में आपदा पर सीएम धामी बोले- उत्तराखंड साथ, मदद के लिए भेजी टीम 8-10 दिन रहेगी

नेपाल में आपदा पर सीएम धामी बोले- उत्तराखंड साथ, मदद के लिए भेजी टीम 8-10 दिन रहेगी

September 18, 2026
उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी डिजिटल मैपिंग, बिना नेटवर्क भी रास्ता बताएगा ऐप

उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी डिजिटल मैपिंग, बिना नेटवर्क भी रास्ता बताएगा ऐप

September 18, 2026
TMC से ममता और LJP से चिराग को कैसे मिला नाम-निशान? जानें शिंदे केस का पूरा नियम

TMC से ममता और LJP से चिराग को कैसे मिला नाम-निशान? जानें शिंदे केस का पूरा नियम

September 18, 2026

Recent News

अंकिता भंडारी को न्याय की मांग, गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर दी श्रद्धांजलि

अंकिता भंडारी को न्याय की मांग, गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर दी श्रद्धांजलि

September 18, 2026
नेपाल में आपदा पर सीएम धामी बोले- उत्तराखंड साथ, मदद के लिए भेजी टीम 8-10 दिन रहेगी

नेपाल में आपदा पर सीएम धामी बोले- उत्तराखंड साथ, मदद के लिए भेजी टीम 8-10 दिन रहेगी

September 18, 2026
उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी डिजिटल मैपिंग, बिना नेटवर्क भी रास्ता बताएगा ऐप

उत्तराखंड के 100 ट्रेक रूट्स की होगी डिजिटल मैपिंग, बिना नेटवर्क भी रास्ता बताएगा ऐप

September 18, 2026
TMC से ममता और LJP से चिराग को कैसे मिला नाम-निशान? जानें शिंदे केस का पूरा नियम

TMC से ममता और LJP से चिराग को कैसे मिला नाम-निशान? जानें शिंदे केस का पूरा नियम

September 18, 2026

जगत आनंदेश्वर टाइम्स एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र है, जो निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित है। यह समाचार पत्र भारत सरकार के आरएनआई (RNI) एवं डीएवीपी (DAVP) से पंजीकृत है, जो इसकी विश्वसनीयता और प्रमाणिकता को दर्शाता है।

Follow Us

Browse by Category

  • अन्य
  • इंडिया
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • दिल्ली NCR
  • बिजनेस
  • बिहार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राज्य
  • लाइफस्टाइल
  • विश्व
  • शिक्षा

Recent News

अंकिता भंडारी को न्याय की मांग, गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर दी श्रद्धांजलि

अंकिता भंडारी को न्याय की मांग, गांधी पार्क से घंटाघर तक मानव श्रृंखला बनाकर दी श्रद्धांजलि

September 18, 2026
नेपाल में आपदा पर सीएम धामी बोले- उत्तराखंड साथ, मदद के लिए भेजी टीम 8-10 दिन रहेगी

नेपाल में आपदा पर सीएम धामी बोले- उत्तराखंड साथ, मदद के लिए भेजी टीम 8-10 दिन रहेगी

September 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Contact Us

© 2026 Jagat Anandeshwar Times - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली NCR
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • झारखंड
    • गुजरात
    • छतीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू & कश्मीर
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • लाइफस्टाइल
    • धर्म
    • हेल्थ
    • फूड
    • फैशन
    • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • खेल
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो
  • अन्य

© 2026 Jagat Anandeshwar Times - All Rights Reserved.