Saturday, August 22, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Contact Us
Jagat Anandeshwar Times
Advertisement
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली NCR
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • झारखंड
    • गुजरात
    • छतीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू & कश्मीर
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • लाइफस्टाइल
    • धर्म
    • हेल्थ
    • फूड
    • फैशन
    • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • खेल
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो
  • अन्य
No Result
View All Result
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली NCR
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • झारखंड
    • गुजरात
    • छतीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू & कश्मीर
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • लाइफस्टाइल
    • धर्म
    • हेल्थ
    • फूड
    • फैशन
    • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • खेल
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो
  • अन्य
No Result
View All Result
Jagat Anandeshwar Times
No Result
View All Result
Home विश्व

इंडस वाटर ट्रीटी विवाद से सहमा बांग्लादेश, अब गंगा जल संधि पर चाहता है नया समझौता

News Desk by News Desk
May 19, 2026
in विश्व
0
इंडस वाटर ट्रीटी विवाद से सहमा बांग्लादेश, अब गंगा जल संधि पर चाहता है नया समझौता
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ढाका 

बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने कहा है कि भारत के साथ संबंध गंगा जल बंटवारा संधि पर निर्भर करेंगे. इसी साल दिसंबर में यह संधि समाप्त हो जाएगी. इस संधि पर साल 1996 में हस्ताक्षर किए गए थे. इस संधि को आगे जारी रखने के लिए 30 साल पूरे होने के बाद इसे रिन्यू करना होगा। 

बांग्लादेश ने फिर अलापा राग
बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि बांग्लादेश नए सिरे से की जाने वाली संधि की अहमियत के संबंध में नई दिल्ली को स्पष्ट संदेश भेजना चाहता है. उन्होंने आगे कहा, “भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने का अवसर गंगा जल बंटवारा संधि या फरक्का समझौते पर हस्ताक्षर होने पर निर्भर करेगा। 

मौजूदा भारत-बांग्लादेश समझौता, पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज पर गंगा नदी के पानी के बंटवारे को कंट्रोल करता है. संधि की अवधि समाप्त होने के करीब आने के साथ ही, बीएनपी नेताओं ने भारत पर एक नई व्यवस्था के लिए बातचीत शुरू करने की बात करनी शुरू कर दी है. तर्क दिया है कि किसी भी नए समझौते में बांग्लादेश की जरूरतों की झलक होनी चाहिए। 

संधि को रिन्यू करने की मांग
आलमगीर ने कहा, “हम भारत सरकार को एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि बांग्लादेश के लोगों की अपेक्षाओं के अनुसार चर्चा के माध्यम से एक नई संधि को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। 

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब बांग्लादेश पद्मा नदी पर एक बड़ी बैराज परियोजना पर भी आगे बढ़ रहा है. इसके बारे में ढाका का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत के फरक्का बैराज से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करना है। 

गंगा संधि क्यों मायने रखती है
इस बहस के केंद्र में खुद गंगा जल बंटवारा संधि है. भारत और बांग्लादेश के बीच यह द्विपक्षीय समझौता है, जो फरक्का में कम पानी वाले मौसम के दौरान गंगा के पानी के बंटवारे को कंट्रोल करता है. दोनों पड़ोसियों के बीच सालों की बातचीत और अस्थायी जल-बंटवारे की व्यवस्था के बाद, पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के कार्यकाल के दौरान 12 दिसंबर 1996 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। 

यह संधि मुख्य रूप से 1 जनवरी से 31 मई के बीच पानी के वितरण को कवर करती है, जब नदी का प्रवाह तेजी से घट जाता है और दोनों देश कृषि, परिवहन तथा दैनिक उपयोग के लिए नदी पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं। 

कैसे होता है पानी का बंटवारा
समझौते के तहत, यदि फरक्का में पानी का प्रवाह 70 हजार क्यूसेक या उससे नीचे गिर जाता है, तो भारत और बांग्लादेश प्रत्येक को उपलब्ध पानी का आधा हिस्सा मिलता है. जब प्रवाह 70 हजार और 75 हजार क्यूसेक के बीच होता है, तो बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक मिलता है. भारत को शेष हिस्सा मिलता है. यदि प्रवाह 75 हजार क्यूसेक से अधिक हो जाता है, तो भारत को 40 हजार क्यूसेक मिलता है. बांग्लादेश को बाकी का हिस्सा मिलता है। 

यदि पानी का स्तर तेजी से गिरता है, तो संधि में कोई निश्चित न्यूनतम गारंटी शामिल नहीं है. इसके बजाय, अनुच्छेद 2 में कहा गया है कि यदि किसी भी 10 दिनों की अवधि के दौरान फरक्का में प्रवाह 50 हजार क्यूसेक से नीचे चला जाता है, तो दोनों देश तत्काल परामर्श करेंगे. इस समय “समानता, निष्पक्षता और किसी भी पक्ष को नुकसान न पहुंचाने” के आधार पर आपातकालीन समायोजन करेंगे। 

फरक्का बैराज एक बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है
यह समझौता इस बात की भी गारंटी देता है कि 11 मार्च से 10 मई के बीच सूखे के मौसम की सबसे संवेदनशील अवधि के दौरान, भारत और बांग्लादेश तीन अलग-अलग 10-दिवसीय चक्रों में बारी-बारी से 35 हजार क्यूसेक पानी प्राप्त करेंगे। 

भारत-बांग्लादेश संबंधों में फरक्का बैराज खुद दशकों से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है. बांग्लादेश सीमा के पास पश्चिम बंगाल में स्थित इस बैराज का निर्माण भारत द्वारा 1970 के दशक में गंगा से हुगली नदी में पानी मोड़ने के लिए किया गया था. इससे तलछट को साफ किया जाता है, ताकि कोलकाता बंदरगाह पर नौवहन क्षमता में सुधार किया जा सके। 

बांग्लादेश लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि इस डाइवर्जन से सूखे के महीनों के दौरान निचले प्रवाह में पानी का बहाव कम हो जाता है. इससे कृषि, मत्स्य पालन, भूजल भंडार और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है। 

गंगा चपाई नवाबगंज जिले के माध्यम से बांग्लादेश में प्रवेश करती है. यहां इसे स्थानीय रूप से ‘पद्मा’ नदी के नाम से जाना जाता है. यह देश की सबसे महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों में से एक बनी हुई है. खेती, मछली पकड़ने, पारिस्थितिकी तथा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए यह केंद्रीय भूमिका निभाती है। 

सैकड़ों नदियों से घिरा बांग्लादेश, ऊपरी प्रवाह वाले भारत के साथ जल-बंटवारे की व्यवस्था पर बहुत अधिक निर्भर है. दोनों देश 54 सीमा पार नदियों को साझा करते हैं। 

आलमगीर के अनुसार, बांग्लादेश की लगभग 17 करोड़ आबादी का करीब एक-तिहाई हिस्सा आजीविका और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नदी प्रणाली पर निर्भर है। 

भारत लगातार यह कहता रहा है कि फरक्का बैराज मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह पर नौवहन क्षमता बनाए रखने के लिए बनाया गया था. हुगली नदी में मोड़ा गया पानी तलछट को बाहर निकालने और शिपिंग चैनलों को बेहतर बनाने में मदद करता है। 

संधि की समाप्ति ने राजनीतिक तनाव को दोबारा बढ़ाया
यह मुद्दा अब फिर से सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि वर्तमान संधि की समाप्ति अवधि नजदीक आ रही है. बांग्लादेश के भीतर इस बात को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है कि इसकी जगह क्या होना चाहिए। 

बीएनपी नेताओं ने मांग की है कि वर्तमान समझौते की अवधि समाप्त होने से काफी पहले एक नए समझौते पर बातचीत शुरू हो जानी चाहिए. आलमगीर ने यह भी तर्क दिया कि जब तक एक वैकल्पिक संधि को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक मौजूदा व्यवस्था लागू रहनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य के जल-बंटवारे के समझौते निश्चित समय-सीमा तक सीमित नहीं होने चाहिए। 

यह नई चर्चा बांग्लादेश द्वारा पद्मा नदी पर एक बड़ी बैराज परियोजना को मंजूरी देने के कुछ ही दिनों बाद आई है. इसके बारे में ढाका का कहना है कि इसका उद्देश्य फरक्का बैराज के “नकारात्मक प्रभाव” की भरपाई करना है. इस परियोजना के 2033 तक पूरा होने की उम्मीद है। 

Previous Post

सुशासन तिहार 2026 : समाधान शिविर बना दिव्यांग तुलेश्वरी के लिए सहारा, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल मिलने से बढ़ी आत्मनिर्भरता की उम्मीद, अब बिना किसी सहारे आसानी से कर सकेंगी आवागमन….

Next Post

नेपाल में बालेन सरकार के बुलडोजर एक्शन से बढ़ी चिंता, भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

News Desk

News Desk

Next Post
नेपाल में बालेन सरकार के बुलडोजर एक्शन से बढ़ी चिंता, भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

नेपाल में बालेन सरकार के बुलडोजर एक्शन से बढ़ी चिंता, भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Trending
  • Comments
  • Latest
टी-20 टीम में बड़ा बदलाव: सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर बने नए कप्तान

टी-20 टीम में बड़ा बदलाव: सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर बने नए कप्तान

June 5, 2026
Vedanta Demerger: वेदांता से निकलीं 4 नई कंपनियां, अनिल अग्रवाल का बड़ा दावा- हर बिजनेस बनेगा $100 अरब का दिग्गज

Vedanta Demerger: वेदांता से निकलीं 4 नई कंपनियां, अनिल अग्रवाल का बड़ा दावा- हर बिजनेस बनेगा $100 अरब का दिग्गज

June 15, 2026
यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

November 25, 2025
मुंबई पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: मुहर्रम जुलूस में जहरीले कैप्सूल बांटता आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: मुहर्रम जुलूस में जहरीले कैप्सूल बांटता आरोपी गिरफ्तार

June 28, 2026
राम मंदिर में ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा जय श्रीराम, श्रद्धालुओं को देवलोक की अनुभूति

राम मंदिर में ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा जय श्रीराम, श्रद्धालुओं को देवलोक की अनुभूति

0
यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

यूपी चुनाव से पहले कांशीराम वाले अंदाज में लौटेंगी BSP चीफ मायावती, नोएडा से शुरू होगा चुनावी अभियान

0
मुझसे नहीं होगा ये काम, नोएडा में SIR की ड्यूटी से परेशान महिला टीचर ने BLO पद से दिया इस्तीफा

मुझसे नहीं होगा ये काम, नोएडा में SIR की ड्यूटी से परेशान महिला टीचर ने BLO पद से दिया इस्तीफा

0
मैं पूरे देश में बीजेपी की नींव हिला दूंगी, ममता बनर्जी की बीजेपी को बड़ी चेतावनी, SIR पर भड़कीं

मैं पूरे देश में बीजेपी की नींव हिला दूंगी, ममता बनर्जी की बीजेपी को बड़ी चेतावनी, SIR पर भड़कीं

0
युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें : धामी।

युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें : धामी।

August 21, 2026
Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

August 21, 2026
Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

August 21, 2026
सौर सुजला योजना-किसानों के खेतों तक पहुंची सूरज की रोशनी, बढ़ी सिंचाई की ताकत….

सौर सुजला योजना-किसानों के खेतों तक पहुंची सूरज की रोशनी, बढ़ी सिंचाई की ताकत….

August 21, 2026

Recent News

युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें : धामी।

युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें : धामी।

August 21, 2026
Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

August 21, 2026
Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

August 21, 2026
सौर सुजला योजना-किसानों के खेतों तक पहुंची सूरज की रोशनी, बढ़ी सिंचाई की ताकत….

सौर सुजला योजना-किसानों के खेतों तक पहुंची सूरज की रोशनी, बढ़ी सिंचाई की ताकत….

August 21, 2026

जगत आनंदेश्वर टाइम्स एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र है, जो निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित है। यह समाचार पत्र भारत सरकार के आरएनआई (RNI) एवं डीएवीपी (DAVP) से पंजीकृत है, जो इसकी विश्वसनीयता और प्रमाणिकता को दर्शाता है।

Follow Us

Browse by Category

  • अन्य
  • इंडिया
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • दिल्ली NCR
  • बिजनेस
  • बिहार
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राज्य
  • लाइफस्टाइल
  • विश्व
  • शिक्षा

Recent News

युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें : धामी।

युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें : धामी।

August 21, 2026
Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

Uttarakhand News: घर वापसी का प्लान तैयार! पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए धामी सरकार का बड़ा कदम, रोजगार के साथ रिवर्स पलायन पर फोकस,,,,

August 21, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Contact Us

© 2026 Jagat Anandeshwar Times - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • दिल्ली NCR
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • मध्य प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • झारखंड
    • गुजरात
    • छतीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • जम्मू & कश्मीर
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • लाइफस्टाइल
    • धर्म
    • हेल्थ
    • फूड
    • फैशन
    • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • खेल
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो
  • अन्य

© 2026 Jagat Anandeshwar Times - All Rights Reserved.